वेईटर : हेल्लो...सुमन दी... हेल्लो

सुमन : हम्म

वेईटर : हेल्लो सुमन दी

सुमन : हेल्लो

वेईटर : कैसी है आप? और क्या हुआ? आज आप कुछ खोई खोई सी है।

सुमन : नही वो में कुछ सोच रही थी। आप कैसे हो?

वेईटर : हम तो हमेशा से ही अच्छे हो ते है। जब आप की कविता, शायरी या ग़ज़ल सुन ले तो और भी अच्छे हो जाते है। पर एक सवाल था हमारा की "कविता" का मतलब क्या होता है?

सुमन : मुस्कुराते हुए... जब हम जीवन के किसी रास्ते से गुजरते है या किसी ओर को दूसरे रास्ते से गुजरते हुए देखे, जो दर्द या अच्छी बाते या फिर हम कोई भावुक पल को शब्दो मे लिखे और वो किसी अंजान को रुला दे वो कविता।

वेईटर : आप की कविता और शब्दो से शायद में भी कवि बन जाऊंगा ।

सुमन : हंसते हुए... हाँ अच्छी बात है, पर कविता कभी समझाई नही जाती उसे तो बस शब्दो के साथ जिया जाता है और कविता खत्म होते ही वो कविता सुनने वाले के मन में अपनी एक जगह बना लेती है। जो अमर हो जाती है कवि या कवियत्री के शब्दो के साथ...

वेईटर : अरे आप खड़ी क्यु है।

सुमन : जहाँ लगाव होता है, वहा दर्द के लिए या सुविधा को स्थान नहीं दिया जाता ।

वेईटर : फिर भी आप कवियत्री है... हँसते हुए... कहिए क्या चाहि आपको?

सुमन : कॉफी......

वेईटर : जी, दी।

आदि : हेल्लो... सुमन कैसी हो यार बड़े दिनों के बाद और तुम इस शहर में कैसे... क्या मैं यहां बैठ सकता हुं।

सुमन : हां, बिलकुल बैठो ना... तुम कैसे हो? तुम भी तो बड़े दिनों के बाद मिले हो। तुम तो मानो दोस्तों को भूल ही गए।

आदि : नही यार, कॉलेज के बाद पापा का बिजनेस देखने लगा था। और वक्त नहीं रहता की दोस्तो को वक्त दे सकू और अब जब शादी हो गई तो मैंने अपना बिजनेस इस शहर में ले लिया है। तो अब में यही हूं। अपनी पत्नि के साथ।

सुमन : अच्छा, तो तुम ने शादी कर ली है। क्या बात है। हंसते हुए... पर तुमने मुझे बुलाया नही?

आदि : माफ करना यार शादी में इस तरह खुश था की उसके सिवा कुछ और नजर ही नही आया।

सुमन : बहुत प्यार करते हो, अपनी पत्नि से? हमे भी तो मिलाओ।

आदि : हां जरूर, तुमने शादी नही की?

सुमन : नजर चुराते हुए.....मेरी कविता में तुम्हारे इस सवाल का जवाब है।

आदि : वाह, तुम अभी भी कविता लिखती हो?

सुमन : हां, कुछ बाते और आदतें कभी खत्म नहीं होती।

आदि : सही कहा तुमने। क्या है वो जवाब मतलब कविता सुनाओ।

सुमन :कैसे हो, बड़े दिनों के बाद मिलना हुआ।

आदि :  हाँ, अच्छा हूँ, पर एक सवाल था?

सुमन :हाँ, पूछो ना।

आदि : तुमने कहा था। जो तुम नहीं तो में मर जाऊँगी, पर तुम तो जिंदा हो।

सुमन :हाँ, जिंदा हूँ। ज़िंदगी के हर दिन को मौत से ज्यादा जी रही हूँ।

तुम किसी और के चाँद बन गए।
पर मेरे मन के गगन में तुम्हारे नाम के सितारे आज भी है।

जिसने कहा था सारी उम्र साथ दूंगा, मेरा हाथ पकड़ कर, जब जरूरत थी मुझे तब तो नहीं था।
कहो कैसे में अपने पापा की उँगलिया छोड़ दूँ।

हर कदम पर साथ रहूँगा जो बोलता था मुझे, जब गिरी तो सामने नजर तक न आया।
कहो कैसे में अपने मम्मी का आँचल छोड़ दूँ।

सब को देखते हुए, दीवारों पर जिसकी नजर रुक जाती और मुझे राखी के लिए याद करती, उस भाई को कैसे छोड़ देती।

तुम्हारे प्यार की कसम मर जाती तुम्हारे बिना पर मेरे बाद ये समाज मुझे चरित्रहीन कह कर मेरे परिवार को जीने नहीं देती।
जमाने के कुछ काम पूरे कर रहा है, ये शरीर जो अधूरे है।

तुम्हारे सवाल का जवाब की में मर चुकी हूँ।

सच कहूँ तो तुम्हारे नाम का सिंदूर लगा कर इस शरीर को जला चुकी हूँ।
तूम तो खुश हो किसी के साथ और जिंदा हो, मैं तो जीते जी मर चुकी हूँ।

 - JSATYAM RAJPUT