(तीन साल की शादी फिर तलाख आज चार साल बाद मिले है, आनंद औरशिल्पा)

शिल्पा : (आनंद को देखते हुए, मन में बोलती है।) तुम्हारे लिए में आज भी हर रिश्ते से लड़ सकती हूँ। पर क्या फायदा तुम्हें अपनी सोसायटी की इज्जत मुझ से ज्यादा प्यारी है। मैंने कभी तुम से कोई शिकायत नहीं की थी। पर न जाने क्या बात थी की तुम्हें मेरी कोई कदर ही न थी। में खुश हूँ मेरे कारण अब तुम्हें कोई बोलता नहीं होगा, सुनाता नहीं होगा चलो अच्छा है। मैं दूर सही पर तुम्हें खुशी दे रही हूँ। पर ये मन है की मानता नहीं और नजर तुम्हें देखने के लिए हर रेखा पार कर लेती है। तुमने तो मुझ से हर रिश्ते तोड़ रखे है। पर वो समय जब तुम मेरे करीब थे। उन बातों के लिए तो तुम एक बार बात कर लेते तो उम्र गुजारने में तकलीफ कम होती। बहुत कुछ है मेरे दिल में तुम्हें कहना चाहती थी, पर तुम्हारे लिए दुनियादारी जरूरी है। दिल के रिश्ते कभी-कभी बोझ बन कर हमारा ही दम निकाल देती है। मैंने कोशिश की थी, अपने रिश्ते को बचाने की पर एक तरफा कोशिश रंग नहीं लाती शायद ये तुम कभी समझ ही न सके।

(शिल्पा आँखों को पोछती है, मानो वो अपना दर्द किसी से बांटना नहीं चाहती।)

आनंद : (शिल्पा को देखते हुए नहीं देखा ऐसा जताकर आगे निकल जाता है। अपनी दूसरी पत्नी रोहिणी से बात करते हुए।)

लेखक : आनंद की आँखों में बेचैनी थी। मैंने रोता हुआ इंसान तो देखा पर आनंद सिर्फ रो नहीं रहा था, उस के हर आँसू के साथ वो अपने दर्द बोलना चाहता था, पर चुप था। वो बोलना चाहता था, पर किसे बोले उसके मन का मीत नहीं था और अब वो आने वाला भी नहीं था। पर मैंने आनंद के आंसुओं को अपने शब्दों में रखा है।


न जाने क्या बात थी उस में,
आज इतने सालो बाद भी,
मेरे जुबा पे उसी की बात थी।

हर चहेरा था मेरे पास पर,
उस चहेरे की कुछ और बात थी।

उसकी आंखे कहती थी तुम्हे रोना होगा,
बिना मेरे तड़पना होगा।

प्यार में दर्द मिलता है,
खुद को ये कहकर समझा लूंगी,
तुम कैसे समझाओगे खुदको।

आंसुओ के साथ तुम्हे जीना होगा,
कह न सको वो दर्द तुम्हे सहना होगा,
कहती थी उसकी आंखे तुम्हे रोना होगा।

इस वक्त में जब हर खून के रिश्ते दम तोड देते है,
न जाने कौन से रिश्ते के लिए वो अपने,
हर रिश्ते से लड़ कर आई थी।

मेरे एक दीदार के लिए,
न जाने कितने रातों की नींद छोड़ के आई थी।

पगली थी मेरे प्यार में मेरा चहेरा देखकर,
बिन बात रोने लगती थी।

कोई डर था उसके मन में जिसे सोचकर,
कुछ पल के लिए वो मर जाती थी,
इस समय तो में उसका हु ये सोचकर जी लेती थी।

कहती थी उसकी आंखें तुम्हे रोना होगा,
बिना मेरे तड़पना होगा।

चाहता तो में उसका हो सकता था,
पर झूठी शान में चुप था।

लड़ती रही वो हर शख्स से मेरे लिए,
और सम्मान के लिए में मौन था।

जिस्म के हर हिस्से में दर्द था उसके,
मानो उस दर्द को में आज भी जी रहा हूं।

भर गए होंगे उसके सारे जख्म पर में आज भी घायल हु,
लोगो की सोचा तो एक सच्चा साथी खो दिया।

होती पास आज मेरे तो आज भी लड़ती,
मुझे खुश रखती,
पर मेरा दिल भी मानता है,
ये मेरी सजा है।

उसके हर बात को मुझे सच करना होगा,
कहती थी उसकी आंखें तुम्हे रोना होगा,
बिना मेरे तुम्हे तड़पना होगा।
- JSATYAM RAJPUT